|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| |
|
|
|
Chaho to sahi!!!
हसरते दिल मेहे पर धड़कनो को पता हीं नही अहसास तेरे होने का कंही ये मेरी खता तो नही
गुमसुम सा ही सही तेरा साया साथ तो हे अपना नही पर अपनो मे तू खास तो हे
हर लफ्ज़ तेरा अपना तो हे पर इन लफ़्ज़ो मे वो अहसास ही नही
रिश्तो मे ये दूरिया फिर से क्यू हे ज़ज़्बातो मे पड़ा रंग कंही कम तो नही
समझोते से क्या रिश्ता बनता हे बनता ह तो क्या निभता भी हे
दिल का रिश्ता तो सांसो से भी गहरा हे चोट लग जाए तो मरहम भी कन्हा मिलता हे
अपनाओ तो अपनाओ प्यार से मत समझो अपना पर,चाहो तो मुझे प्यार से
|
|
| | |
|
|
|
|
|
|
|